एनएल चर्चा 140: फ्रांस में हुई आतंकवादी घटनाएं, बल्लभगढ़ हत्याकांड और आरोग्य सेतु ऐप

हिंदी पॉडकास्ट जहां हम हफ़्ते भर के बवालों और सवालों पर चर्चा करते हैं.

एनएल चर्चा 140: फ्रांस में हुई आतंकवादी घटनाएं, बल्लभगढ़ हत्याकांड और आरोग्य सेतु ऐप
  • whatsapp
  • copy

अतुल चर्चा में शार्दूल को शामिल करते हुए पूछते हैं, “इस तरह की जो घटनाएं हैं उन पर मीडिया और सोशल मीडिया में दो फाड़ है. इसका कोई तार्किक जवाब किसी के पास नहीं है. जिस तरह से फ्रांस में ट्यूनीशिया से आए एक आरोपी ने हत्या कर दी उसे ‘लोन वुल्फ’ अटैक कह सकते हैं क्या? तो फिर हम राजस्थान में शम्भूलाल रैगर द्वारा की गई हत्या को किस तरह देखेंगे. इस तरह की घटना को लोन वुल्फ अटैक कह कर दरअसल पूरी समस्या को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं या समझने की कोशिश नहीं कर रहे हैं.”

इस पर शार्दूल कहते है, “आपकी बात बहुत हद की सही है. यह बात ठीक है कि सोशियो-इकोनॉमी फैक्टर होते हैं किसी घटना के पीछे लेकिन यही कारण हत्या का हो सकता है, यह सही नहीं है. फ्रांस की घटना ‘लोन वुल्फ अटैक’ का उदाहरण नहीं है क्योंकि तीन और जगहों पर हमले की कोशिश हुई है. फ्रांस में धार्मिक कट्टरता बहुत पहले से है. दूसरी बात आप किसी भी व्यक्ति को उसके धार्मिक पहलू को लेकर बता नहीं सकते, सीखा नहीं सकते.”

अन्य विषयों के लिए पूरी चर्चा सुनें और न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करना न भूलें.

क्या देखा पढ़ा और सुना जाए.

रेफरेंस

कौन है टीवी का ‘मुस्लिम चेहरा’? एक ठग?

फ्रेंच सेकुलरिज्म

आरोग्य सेतु ऐप

सलाह और सुझाव

कादम्बिनी शर्मा

मिर्जापुर सीजन 2

बर्टिल लीटनर - चाइना इंडिया वार

प्रतिभा करण की पुस्तक- बिरयानी

शार्दूल कात्यायन

ब्रेडली होप और जस्टिन स्नेक की किताब - ब्लड एंड ऑयल

इंटेलिजेंस स्कॉड डिबेट - इस्लाम इज रिलीजन ऑफ पीस

मेघनाथ

न्यूयॉर्कर पर प्रकाशित लेख - वाय फैक्ट्स टोंड चेंज आवर माइंड

मिर्जापुर सीजन 2

अतुल चौरसिया

टेक्स्ट एंड कॉन्टेक्स्ट - आऱिफ मोहम्मद खान

बोराट सब्सिक्वेंट मूवीफिल्म - अमेज़न प्राइम

Also Read : इतना मुश्किल क्यों है मुस्लिम फंडामेंटलिज़्म पर बात करना
Also Read : इतिहास: महाराणा प्रताप हिंदू-मुस्लिम भेद नहीं रखते थे
newslaundry logo

Pay to keep news free

Complaining about the media is easy and often justified. But hey, it’s the model that’s flawed.
newslaundry logo

Pay to keep news free

Complaining about the media is easy and often justified. But hey, it’s the model that’s flawed.

You may also like