भारत के 75 फीसदी से ज्यादा जिलों पर मंडरा रहा है जलवायु परिवर्तन का खतरा

देश का करीब 12 फीसदी हिस्सा बाढ़ और 68 फीसदी हिस्सा सूखे की जद में है. इसी तरह देश की करीब 80 फीसदी तटरेखा पर चक्रवात और सुनामी का खतरा बना हुआ है.

भारत के 75 फीसदी से ज्यादा जिलों पर मंडरा रहा है जलवायु परिवर्तन का खतरा
  • whatsapp
  • copy

इसी तरह 2005 के बाद से हर साल 24 जिलों पर चक्रवातों की मार पड़ रही है. इन वर्षों में करीब 4.25 करोड़ लोग तूफान और चक्रवातों से प्रभावित हुए हैं. यदि पिछले एक दशक को देखें तो इनका असर अब तक करीब 258 जिलों पर पड़ चुका है. देश में पूरी तटरेखा के आसपास पुरी, चेन्नई, नेल्लोर, उत्तर 24 परगना, गंजम, कटक, पूर्वी गोदावरी और श्रीकाकुलम पर इन चक्रवातों का सबसे ज्यादा असर पड़ा है. जिसके लिए जलवायु परिवर्तन, भूमि उपयोग में आ रहा बदलाव और वनों का विनाश मुख्य रूप से जिम्मेवार है. यदि 1970 से 2019 के बीच चक्रवात की घटनाओं पर गौर करें तो इन वर्षों में यह घटनाएं 12 गुना बढ़ गई हैं.

इस रिपोर्ट में एक हैरान कर देने वाली बात यह सामने आई है कि पहली जिन जिलों में बाढ़ आती थी अब वहां सूखा पड़ रहा है. इसी तरह जो जिले पहले सूखा ग्रस्त थे अब वो बाढ़ की समस्या से त्रस्त हैं. आपदाओं की प्रवृति में हो रहा यह बदलाव 40 फीसदी जिलों में अनुभव किया गया है. यदि इसकी प्रवृति की बात करें तो जो जिले बाढ़ से सूखाग्रस्त बन रहे हैं उनकी संख्या सूखे से बाढ़ग्रस्त बनने वाले जिलों से कहीं ज्यादा है जो दिखाता है कि देश में सूखे का कहर बढ़ रहा है. रिपोर्ट में इसके लिए देश में क्षेत्रीय स्तर पर हो रहे जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ भूमि उपयोग में किए जा रहे बदलावों, वनों के विनाश, मैन्ग्रोव और वेटलैंड पर हो रहे अतिक्रमण को जिम्मेवार माना है.

(साभार- डाउन टू अर्थ)

इसी तरह 2005 के बाद से हर साल 24 जिलों पर चक्रवातों की मार पड़ रही है. इन वर्षों में करीब 4.25 करोड़ लोग तूफान और चक्रवातों से प्रभावित हुए हैं. यदि पिछले एक दशक को देखें तो इनका असर अब तक करीब 258 जिलों पर पड़ चुका है. देश में पूरी तटरेखा के आसपास पुरी, चेन्नई, नेल्लोर, उत्तर 24 परगना, गंजम, कटक, पूर्वी गोदावरी और श्रीकाकुलम पर इन चक्रवातों का सबसे ज्यादा असर पड़ा है. जिसके लिए जलवायु परिवर्तन, भूमि उपयोग में आ रहा बदलाव और वनों का विनाश मुख्य रूप से जिम्मेवार है. यदि 1970 से 2019 के बीच चक्रवात की घटनाओं पर गौर करें तो इन वर्षों में यह घटनाएं 12 गुना बढ़ गई हैं.

इस रिपोर्ट में एक हैरान कर देने वाली बात यह सामने आई है कि पहली जिन जिलों में बाढ़ आती थी अब वहां सूखा पड़ रहा है. इसी तरह जो जिले पहले सूखा ग्रस्त थे अब वो बाढ़ की समस्या से त्रस्त हैं. आपदाओं की प्रवृति में हो रहा यह बदलाव 40 फीसदी जिलों में अनुभव किया गया है. यदि इसकी प्रवृति की बात करें तो जो जिले बाढ़ से सूखाग्रस्त बन रहे हैं उनकी संख्या सूखे से बाढ़ग्रस्त बनने वाले जिलों से कहीं ज्यादा है जो दिखाता है कि देश में सूखे का कहर बढ़ रहा है. रिपोर्ट में इसके लिए देश में क्षेत्रीय स्तर पर हो रहे जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ भूमि उपयोग में किए जा रहे बदलावों, वनों के विनाश, मैन्ग्रोव और वेटलैंड पर हो रहे अतिक्रमण को जिम्मेवार माना है.

(साभार- डाउन टू अर्थ)

newslaundry logo

Pay to keep news free

Complaining about the media is easy and often justified. But hey, it’s the model that’s flawed.

You may also like