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लखनऊ यूनिवर्सिटी: पहले 'ह्यूमन चेन' फिर 'हनुमान चालीसा' और 'गंगाजल', कैंपस में तनातनी
लखनऊ यूनिवर्सिटी परिसर, जो कल तक हिंदू-मुस्लिम छात्रों की एकजुटता और 'ह्यूमन चेन' का गवाह बना था, आज उसका रंग पूरी तरह बदला हुआ नज़र आया. जिस लाल बारादरी के सामने कल नमाज़ अदा की गई थी, आज वहां दक्षिणपंथी छात्र संगठनों से जुड़े छात्रों ने भारी जमावड़े के बीच हनुमान चालीसा का पाठ किया और परिसर का 'शुद्धिकरण' करने के लिए गंगाजल का छिड़काव किया.
बता दें कि सोमवार को प्रशासन द्वारा लाल बारादरी, जिसे बादशाह बाग़ के नाम से भी जाना जाता है, के गेट पर ताला लगा दिया गया. जिसके बाद हिंदू छात्रों ने बारादरी के बाहर नमाज़ पढ़ रहे मुस्लिम छात्रों की सुरक्षा के लिए एक ह्यूमन चेन बनाई थी. लेकिन 24 घंटे के भीतर ही कैंपस की हवा बदल गई है. आज बड़ी संख्या में लाल बारादरी के पास छात्र जुटे. इन छात्रों का दावा है कि यह इमारत कोई मस्जिद नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक ढांचा है, जहां कभी नमाज़ नहीं हुई.
लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्र प्रणव कांत सिंह का कहना है, "विश्विद्यालय ने कौम को सुरक्षित करने के लिए एक निर्णय लिया जिसे धार्मिक रंग दिया जा रहा है. यह छात्र नहीं है बल्कि यह सपा और कांग्रेस के लोग हैं."
प्रदर्शनकारी छात्रों ने परिसर में नारेबाजी की और उसी परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ किया जहां कल नमाज़ हुई थी. इसके बाद छात्रों ने गंगाजल का छिड़काव किया. प्रदर्शन स्थल पर मौजूद एक अन्य छात्र ने कहा, "हिन्दू छात्रों ने भी हनुमान चालीसा पढ़कर अपनी धार्मिक आज़ादी का मुज़ाहिरा किया है, जिसकी वजह यह थी कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जाना गलत है और यहां पर सर्वधर्म समभाव का माहौल है."
यहां ग़ौर करने वाली बात यह है कि कल जो छात्र नमाज़ के समर्थन में खड़े थे या जो छात्र नमाज़ अदा कर रहे थे, वे आज कैंपस में कहीं नज़र नहीं आए. पूरे परिसर में आज केवल दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े छात्रों का ही बोलबाला दिखा. कहा जा रहा है कि कल की 'ह्यूमन चेन' वाले छात्र आज सुरक्षा कारणों से या प्रशासनिक दबाव के चलते सामने नहीं आए.
सोशल वर्क डिपार्टमेंट के छात्र डॉ. सलमान ने हमें बताया, "सात महीने से मैं कॉलेज आ रहा हूं. सब कुछ यहां ठीक से चल रहा था, अचानक से प्रशासन के दिमाग़ में कीड़ा काटता है और यह कहा जाता है कि यहां पर नमाज़ नहीं पढ़ी जाएगी.”
इमारत की खस्ता हालत के बारे में सवाल करने पर सलमान कहते हैं, “इमारत जर्जर अवस्था में है, यह बात सच है लेकिन यदि इसका सही से रखरखाव किया जाए तो यह सही रहेगा. इसे खासतौर पर बर्बाद किया गया है. इसके अंदर पेड़ उग आए हैं. इसे जानबूझ कर जर्जर किया गया है क्योंकि यह मुसलमानों की एक मीरास है.”
इस पूरे मामले को लेकर हमने लखनऊ यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के रिटायर्ड प्रोफ़ेसर पी. के. घोष से बात की. उन्होंने बताया, “यह एक इमामबाड़ा है. इसे अवध के नवाब नसीरुद्दीन हैदर द्वारा बनवाया गया था. मेरे सामने यहां पर छात्र और टीचर्स सभी नमाज़ पढ़ते थे. जिसे लेकर कोई विवाद नहीं था.”
उन्होंने आगे कहा, “जिस जर्जरता का हवाला देकर प्रशासन द्वारा इसे बंद किया गया है उसमें मैं छात्रों के साथ खड़ा हूं. यह इतनी सुंदर इमारत है, जिसका संरक्षण किया जाना चाहिए, इसके लिए हमारे विभाग ने कई बार प्रयास किए लेकिन प्रशासन यह चाहता ही नहीं कि यहां पर यह इमारत रहे बल्कि वो चाहते हैं कि यह गिर जाए और इसकी जगह पर दूसरी इमारत बना दी जाए.”
हालात को देखते हुए प्रशासन ने परिसर में पुलिस बल की संख्या बढ़ा दी है. उधर, पुलिस ने बीते दिन के घटनाक्रम को लेकर 13 छात्रों को नोटिस जारी किया गया है. इन छात्रों के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 126/135 के तहत मामला भी दर्ज किया गया है.
हसनगंज थाने के एसएचओ चितवन कुमार ने न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में इसकी पुष्टि की. उन्होंने बताया कि इन 13 छात्रों से एक बॉन्ड भी भरवाया गया है ताकि परिसर में शांति बनी रहे. साथ ही इन सभी छात्रों को 50 हज़ार रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और इतनी ही राशि की दो जमानतें जमा करने का निर्देश भी दिया गया है. हालांकि, चितवन कुमार ने ये स्पष्ट करने से इनकार कर दिया कि ये 13 छात्र कौन हैं.
फिलहाल, यूनिवर्सिटी परिसर का माहौल तनावपूर्ण है.
मणिकर्णिका घाट से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक, उजड़े (ढहा दिए गए) घरों और खामोश हो चुके मोहल्लों के बीच यह सीरीज़ बताएगी कि कैसे तोड़फोड़ की राजनीति बनारस की सिर्फ़ इमारतें नहीं, उसकी आत्मा को भी बदल रही है. बनारस पर हमारे इस सेना प्रोजेक्ट को सपोर्ट करिए.
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