जेएनयू मार्च: ‘हम जियो यूनिवर्सिटी वाले थोड़े हैं’
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जेएनयू मार्च: ‘हम जियो यूनिवर्सिटी वाले थोड़े हैं’

पुलिस को चकमा देकर कैसे संसद भवन के लिए निकले जेएनयू के छात्र.

By बसंत कुमार

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सोमवार को जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी के छात्र फीस वृद्धि के खिलाफ संसद भवन तक मार्च कर अपना विरोध दर्ज कराना चाहते थे, लेकिन रातों-रात सरकार ने पूरे कैम्पस को छावनी में बदल दिया. जेएनयू के आसपास धारा 144 लगा दी गई, फिर भी सैकड़ों की संख्या में छात्र संसद भवन पहुंचने के लिए निकल गए और कैंपस से करीब 10 किलोमीटर दूर जोर बाग़, सफदरजंग के मकबरे तक पहुंचने में कामयाब रहे.

पुलिस ने जेएनयू कैंपस के इर्द गिर्द धारा 144 लगाने के साथ ही वहां से संसद भवन तक के रास्ते में जगह-जगह बैरिकेटिंग भी कर दी थी. सुबह दस बजे सबसे पहले छात्रों ने जेएनयू गेट पर बने बैरिकेट को तोड़ा, उसके बाद केन्द्रीय विद्यालय के पास खड़े बाधा को तोड़ते हुए आगे बढ़े. यहां पर पुलिस ने छात्रों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया. सैकड़ों की संख्या में छात्रों को पुलिस हिरासत में लेकर दिल्ली के अलग-अलग थानों में ले गई. लेकिन छात्रों की बड़ी संख्या पुलिस के इस बंदोबस्त पर भारी पड़ी. अफरा-तफरी का फायदा उठाते हुए सैकड़ों की संख्या में छात्र मुनिरका गांव के रास्ते आरके पुरम तक पहुंच गए और फिर वहां से संसद भवन की तरफ बढ़ चले.

जेएनयू मार्च: ‘हम जियो यूनिवर्सिटी वाले थोड़े हैं’

रिंग रोड होते हुए छात्र ज़ोर बाग़ मेट्रो स्टेशन के सामने अरविंदो मार्ग पर पहुंच कर इकट्ठा हो गए. यहां पुलिस ने पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बैरिकेटिंग कर रखी थी. पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान भी बड़ी संख्या में थे. वाटर कैनन गाड़ियां भी तैनात कर दी गई थीं. तमाम ऑफ ड्यूटी पलिस जवान सादी वर्दी में ही आनन-फानन में वहां पहुंचे थे. उनके पास लाठियां नहीं थी तो एक सब इंस्पेक्टर ने सफदरजंग मकबरे में खड़े एक नीम के पेड़ से टहनियां तोड़कर उनकों पकड़ा दी थी. यानि किसी भी मौके पर बलप्रयोग की जरूरत पड़ सकती थी. दूसरी तरफ छात्रों की गगनभेदी नारेबाजी बीच अरविंदो मार्ग पर ही जारी थी.

सीआरपीएफ और पुलिसकर्मियों को चकमा देकर ज़ोर बाग़ पहुंचे एक छात्र संजीव मिश्रा ने बताया, ‘‘पुलिस को लगा होगा कि हम जियो यूनिवर्सिटी के छात्र है. उनसे यही गलती हो गई. हम जेएनयू वाले हैं. जो हजारों के बीच से चुनकर आते हैं. वो हमें आगे आने से रोक रहे थे तभी हम लोग पीछे से निकल गए.’’

पैदल चलते-चलते थक चुके अयोध्या के रहने वाले दीपक वर्मा आईएनए मेट्रो के सामने बैठकर आराम कर रहे थे. उन्होंने न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए कहा, ‘‘मैं किसी भी छात्र संगठन से जुड़ा नहीं हूं. इस मार्च में सिर्फ अपने कारण आया हूं. बीएचयू से पढ़ाई करने के बाद मैं जेएनयू आया क्योंकि यहां फीस कम है. मेरे पिताजी किसान हैं. खेत भी बहुत ज्यादा नहीं है. उन्हें घर का भी खर्च देखना होता है. अगर फीस वृद्धि लागू हो जाता है तो मुझे खुद पढ़ाई छोड़नी पड़ेगी. क्योंकि मेरे घर वाले मुझे और खर्च नहीं दे सकते.’’

पुलिस पर आरोप

मार्च में शामिल छात्रों ने पुलिस पर मारपीट करने का आरोप लगाया. जब छात्र आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे तब पुलिस ने उन्हें धारा 144 तोड़ने के कारण हिरासत में लेना शुरु कर दिया. इस दौरान पुलिस उन्हें जमकर पीट रही थी और उन्हें बैरिकेट के दूसरी तरफ किसी निर्जीव समान की तरह फेंक रही थी. न्यूज़लॉन्ड्री के पास मौजूद वीडियो में पुलिस की निर्ममता देखी जा सकती है.

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जेएनयू के योगी नाम से मशहूर राघवेंद्र मिश्रा को पुलिस ने ना सिर्फ हिरासत में लिया बल्कि उनका आरोप हैं कि उन्हें बुरी तरह मारा भी गया. हिरासत में लिए जाने के बाद उनका एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो घायल पड़े हैं. राघवेंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहते हैं, ‘‘पूरे देश की जनता से मैं यहीं पूछना चाहता हूं कि हम लोगों ने खुद आरएसएस को सपोर्ट किया था. बीजेपी को वोट दिया. मोदीजी को वोट दिया और योगीजी को वोट दिया. वोट हमने इसलिए दिया दिया था कि हमारा जो हिन्दू समाज है, भारत के जो भी नागरिक है, किसान हैं और मजदूर हैं सबको मुफ्त में शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षा मिलेगी. मैं योगीजी और मोदीजी से पूछना चाहता हूं कि आप लोग रामराज्य की बात करते हो. क्या उस रामराज्य में फ्री शिक्षा नहीं है?”

हिरासत के दौरान एक छात्रा ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, “हम चुपचाप संसद भवन जाकर धरना देते और वापस लौट आते लेकिन पुलिस और सरकार ने इसे इतना बड़ा मामला बना दिया. हम फीस कम करने के लिए तो लड़ रहे हैं और हमारा हक है.’’

जेएनयू की छात्रा स्नेहा अपने वीसी पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहती हैं, ‘‘कमरे में बैठकर ट्वीट करते रहते हैं लेकिन छात्रों से मिलने का उनके पास समय नहीं है. आज छात्रों की जो स्थिति है वो वीसी साहब की वजह से है. छात्रों के भलाई के लिए कुछ भी ना करने की उन्होंने कसम खा रखी है. आप देखिए कि इनके आने के बाद जेएनयू के छात्रों की कितनी दफा जायज मांग को लेकर सड़क पर उतरना पड़ा और पुलिस की लाठी खानी पड़ी है. मोदी सरकार के शिक्षा बेचो नीति को वीसी साहब जेएनयू में लागू करने में व्यस्त है.’’

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जेएनयू के पास पुलिस के बलप्रयोग में कई छात्रों को बुरी तरह चोट आई. छात्र जब संसद भवन पहुंचने के लिए जोर बाग़ मेट्रो स्टेशन पहुंचे तो वहां भी पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया. लाठी चार्ज में घायल एक छात्र अपराजित कहते हैं, ‘‘अभी हम वहां पहुंचे ही थे. हमारे बाकी साथी रास्ते में थे तभी पुलिस ने हम पर लाठी चार्ज कर दिया. हमारे कई साथियों को चोट आई. पुलिस ने मुझे भी  मारा. मुझे चलने में दिक्कत हो रही है.’’

पुलिस द्वारा किए गए लाठी चार्ज में न्यूज़क्लिक वेबसाइट के फोटोग्राफर वी अरुण कुमार के सर पर चोट लगी. बाद में वो सिर पर पट्टी बांध कर घटना कवर करते रहे.

छात्रों द्वारा पुलिस पर लगाए गए आरोप पर सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी एमएस रंधावा न्यूज़लॉन्ड्री को बताते हैं, “पुलिस ने किसी भी छात्र पर लाठी चार्ज नहीं किया है. पुलिस ने काफी संयम से काम लिया है. जहां तक चोट लगने के बात है तो छात्रों ने कई जगहों पर बैरिकेट तोड़ने की कोशिश की है तो उस दौरान कुछ लोगों को चोट आई होगी. पुलिस ने लाठी चार्ज नहीं किया.’’

सरकार द्वारा एक कमिटी का गठन

जोर बाग़ मेट्रो स्टेशन के पास बैठे छात्रों को मनाने और वापस जाने के लिए पुलिस के कई आला अधिकारी पहुंचे. जिसमें पुलिस हेडक्वार्टर के एसपी-सीपी प्रवीण रंजन भी थे. अधिकारियों ने छात्रों को बताया कि सरकार द्वारा 17 नवंबर (संसद-मार्च से एक रोज पहले) एक हाई कमेटी का गठन किया गया है जो इस बढ़े फीस के मामले पर जांच करेगी और इसपर रिपोर्ट देगी. कमेटी छात्रों से भी बात करेगी. इस तीन सदस्यों वाली कमेटी में यूजीसी के पूर्व चेयरमैन वीएस चौहान, एआईसीटीई के चेयरमैन अनिल सहस्त्रबुद्धे और यूजीसी के सेक्रेटरी रजनीश जैन हैं.

इस कमेटी को लेकर जो आदेश जारी हुआ है उसका पर्चा छात्रों के बीच बंटवाया गया. जिस पर जेएनयूएसयू की पूर्व उपाध्यक्ष सारिका चौधरी कहती हैं, ‘‘सरकार ने कमेटी का निर्माण किया ठीक है. लेकिन सरकार को यह भी आदेश देना चाहिए कि जब तक कमेटी रिपोर्ट ना सौंपे तब तक फीस वृद्धि ना की जाए. दूसरी बात इस कमेटी में छात्रों के प्रतिनधियों को भी शामिल किया जाए.’’

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छात्रों की इस मांग पर डीसीपी एमएस रंधावा सहमति दर्ज कराते हुए कहा, “छात्रों की ये मांग जायज है, लेकिन बीच सड़क पर प्रदर्शन करने से क्या हासिल होगा. पास में एम्स और सफदरजंग अस्पताल है. ट्रैफिक बंद हो गया है.’’

जारी रहेगा आंदोलन 

जोर बाग मेट्रो स्टेशन पर पहुंचे छात्रों को वहीं रोक दिया गया. ज्यादा छात्र ना पहुंचने पाएं इसके लिए जोर बाग़ मेट्रो स्टेशन को घंटो तक बंद कर दिया गया. जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एन साईं बालाजी बताते हैं, ‘‘देर शाम जब छात्र सड़क पर बैठकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे तभी पुलिस ने स्ट्रीट लाइट बंद कर दिया और छात्रों पर हमला कर दिया. वहां पर बीस से ज्यादा छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं. कुछ को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. पुलिस ने नेत्रहीन छात्र शाशि भूषण को भी नहीं छोड़ा. शाशि भूषण को काफी चोट आई जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहीं पुलिस ने जिन छात्रों को हिरासत में लिया था उन्हें देर रात तक छोड़ दिया गया.’’

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एन साईं बालाजी कहते, ‘‘जब तक सरकार बढ़ाई हुई फीस कम नहीं करती है तब तक हमारा यह आंदोलन जारी रहेगा.’’

इस बीच एक प्रस्ताव भी सरकार की तरफ से छात्रों को दिया गया लेकिन छात्र इस बात पर अड़ गए कि वीसी खुद उनके बीच आकर उन्हें भरोसा दें और साथ ही उस प्रस्ताव में कुछ बातों को जोड़ें तभी यह आंदोलन खत्म होगा.

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