योगी की जीवनी लिखने वाले पत्रकार बने टाइम्स ऑफ इंडिया लखनऊ के संपादक
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योगी की जीवनी लिखने वाले पत्रकार बने टाइम्स ऑफ इंडिया लखनऊ के संपादक

पूर्व संपादक राजा बोस को हटाने और प्रवीण कुमार को लखनऊ संस्करण का संपादक बनाए जाने की अंतर्कथा.

By बसंत कुमार

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने 10 फरवरी को अपने लखनऊ संस्करण के संपादक राजा बोस को हटाकर प्रवीण कुमार को नया संपादक नियुक्त कर दिया. इसके साथ ही मीडिया के अंडरवर्ल्ड और गॉसिप की महफिलों में इसे लेकर कई तरह की बातें कही-सुनी जाने लगीं.

टाइम्स ऑफ इंडिया के सूत्रों की बात पर भरोसा करें तो राजा बोस को हटाने की वजह रही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की नाराजगी. लखनऊ के सरकारी और मीडिया महकमों में योगी सरकार की बोस के द्वारा की जा रही ख़बरों को लेकर नाराजगी की बातें काफी समय से चल रही थीं. योगी सरकार की इस नाराजगी की वजहों में विस्तार से जाने से पहले हम लखनऊ में तैनात हुए टीओआई के नए संपादक के बारे में भी थोड़ा जान लें. प्रवीण कुमार की पत्रकारीय पहचान के अलावा उनकी एक और महत्वपूर्ण पहचान है योगी आदित्यनाथ की जीवनी लिखने वाले लेखक की. उन्होंने ‘योगी आदित्यनाथ: द राइज ऑफ़ ए सैफरन सोशलिस्ट’ नाम से योगी की जीवनी लिखी है.

26 नवंबर, 2017 को योगी आदित्यनाथ की जीवनी टाइम्स लिट फेस्ट, दिल्ली में लोकार्पित हुई, लेकिन उससे दो दिन पहले ही यह किताब सुर्खियों में आ चुकी थी क्योंकि प्रवीण कुमार उसकी एक प्रति योगी आदित्यनाथ के पास लेकर पहुंचे थे, जिसकी फोटो भी उन्होंने साझा की थी. उस वक्त प्रवीण कुमार लखनऊ में टाइम्स ऑफ़ इंडिया के डिप्टी रेसिडेंट एडिटर थे. इसके कुछ समय बाद संस्थान ने उन्हें वहां से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया था. इस ट्रांसफर की वजह संस्थान से जुड़े एक पूर्व सहयोगी दो कारणों को बताते हैं. पहला की टाइम्स ग्रुप का नियम है कि कुछ सालों बाद इस तरह का ट्रांसफर होता रहता है, दूसरा कारण ये बताया गया कि योगी आदित्यनाथ के साथ करीबी के चलते ऐसा हुआ.

योगी आदित्यनाथ के साथ प्रवीण कुमार
योगी आदित्यनाथ के साथ प्रवीण कुमार

राजा बोस को हटाने की वजह

राजा बोस को लखनऊ से दिल्ली रवाना करने और प्रवीण कुमार को उनकी जगह नियुक्त करने के पीछे कई कहानियां सुनने को मिल रही हैं. वे पिछले छह साल से लखनऊ के स्थानीय एडिटर थे. अखिलेश यादव की सरकार में सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा, लेकिन योगी आदित्यनाथ से उनके रिश्ते उतने अच्छे नहीं रहे.

टाइम्स ऑफ इंडिया लखनऊ से जुड़े एक शख्स बताते हैं, ‘‘राजा बोस से योगी सरकार खुश नहीं थी. नाराजगी की शुरुआत 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बनारस में बन रहे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से हुई. कॉरीडोर को लेकर जिस तरह की खबरें टीओआई में प्रकाशित हुई उससे योगी काफी नाराज़ हुए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में 19 मई हो होने वाले मतदान से पहले 10 मई को इस कोरोडोर से संबंधित ख़बर प्रकाशित हुई. इससे यूपी सरकार नाराज़ हो गई थी. चर्चाएं तो यह भी थी कि योगी सरकार द्वारा उन्हें हटाने को लेकर संदेश भेजा गया था, लेकिन मैनेजमेंट ने जल्दबाजी में कोई फैसला लेने से परहेज किया.’’

सरकार की नाराजगी जारी रही. इसी बीच टाइम्स में सरकार को परेशानी करने वाली ख़बरें होती रही. टीओआई से जुड़े सूत्र कहते हैं, ‘‘नाराज होकर यूपी सरकार ने टीओआई का विज्ञापन भुगतान रोक लिया था. अख़बार में विज्ञापन तो छप रहा था लेकिन भुगतान रुका हुआ था. दबाव में मैनेजमेंट ने राजा बोस को हटाने का निर्णय लिया.’’

किस तरह की खबरों से थी सरकार को परेशानी

योगी सरकार को सबसे ज्यादा परेशानी बनारस में बन रहे काशी विश्वनाथ कोरिडोर पर टाइम्स की रिपोर्ट से हुई थी. इस कोरिडोर को लेकर सरकार की चौतरफा आलोचना हुई थी. उसी दौरान टाइम्स में रिपोर्ट छपी- ‘काशी विश्वनाथ कोरिडोर के निर्माण के चलते मुस्लिम समुदाय में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर बेचैनी’.

इसके अलावा सीएए और एनआरसी को लेकर लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश में चल रहे आंदोलन से जुड़ी खबरें भी लखनऊ संस्करण में प्रमुखता से छपती रहीं. जबकि योगी सरकार सीएए और एनआरसी के आंदोलन को कुचलने के लिए हर क़दम उठा रही है.

पश्चिम उत्तर प्रदेश में पुलिसिया दमन इसकी तस्दीक करता है तो लखनऊ के घंटाघर के पास महिलाओं द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन में उनका सामान पुलिस उठा ले गई. अलीगढ में जिस पार्क में महिलाएं प्रदर्शन कर रही थीं उसमें पानी भर दिया गया. इतना ही नहीं प्रदर्शन के दौरान हुए सरकार नुकसान की भरपाई के लिए लोगों से करोड़ों रुपए वसूलने की तैयारी योगी सरकार कर चुकी हैं.

सूत्र कहते हैं, ‘‘आप राजा बोस का ट्विटर देखें तो आपको अंदाजा लग जाएगा कि वे किस तरह चीजों को देखते हैं. सरकार जिस आन्दोलन को हर तरीके से रोकना चाहती है उस आंदोलन की तस्वीर को उन्होंने अपने ट्विटर प्रोफाइल पिक्चर बनाया है. आन्दोलन से जुड़ी खबरें वो लगातार ट्वीट करते रहते हैं. सरकार टाइम्स में छप रही खबरों से खफा तो थी ही उनके ट्वीट ने नाराज़गी को और बढ़ाया और नतीजा हुआ कि उन्हें वहां से जाना पड़ा.’’

इसको लेकर न्यूजलॉन्ड्री राजा बोस से बात करनी की कोशिश की तो उन्होंने विज्ञापन भुगतान रोकने या योगी सरकार की नाराज़गी से इनकार करते हुए कहा, ‘‘मैं लखनऊ में छह साल से था. मैं खुद मैनेजमेंट से ट्रांसफर के लिए बोल रहा था क्योंकि मेरी बेटी दिल्ली में पढ़ाई करती है. मैं खुद दिल्ली वापस आना चाहता था. मैनेजमेंट ने मेरी बात मान ली. इसमें सरकार की नाराजगी की कोई बात नहीं थी.’’

प्रवीण कुमार का एडिटर बनाया जाना

लखनऊ में पत्रकारिता करने वाले एक पत्रकार बताते हैं, ‘‘लखनऊ में प्रवीण कुमार की जबरदस्त पकड़ और संपर्क है. खासकर प्रशासन में. प्रदेश के सीनियर अधिकारियों में आपकी पकड़ हो तो आप रेवेन्यू लाने में बेहतर भूमिका निभा सकते हैं. प्रवीण कुमार से बेहतर कौन हो सकता था. उन्होंने योगी की जीवनी लिखी है, वो टीओआई और सरकार के बीच सबसे भरोसेमंद सेतु हो सकते हैं.’’

प्रवीण कुमार की प्रशासन और राजनेताओं के बीच पकड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब इस किताब का हिंदी संस्करण ‘योद्धा योगी: योगी आदित्यनाथ की जीवन यात्रा’ के नाम से प्रकाशित हुआ तो उसका लोकार्पण यूपी के तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक, विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने किया. लोकार्पण यूपी विधानसभा के सेंट्रल हॉल में किया गया था.

योगी की जीवनी लिखने वाले पत्रकार बने टाइम्स ऑफ इंडिया लखनऊ के संपादक

इस पूरे विवाद को लेकर प्रवीण कुमार कहते हैं, ‘‘इसमें मैं कुछ नहीं कह सकता. यह मैनेजमेंट का फैसला था, एडिटर ने फैसला लिया तो मैं इस पर क्या बोल सकता हूं. पूर्व में भी मेरा जो ट्रांसफर हुआ था वो भी मैनेजमेंट का ही फैसला था. दिल्ली में मैं एक साल तक था. मेरे ट्रांसफर का मेरी किताब से कोई सम्बन्ध नहीं था.’’

राजा बोस को हटाने के पीछे सरकार की नाराजगी की बात सामने आ रही है, इसको लेकर प्रवीण कुमार कहते हैं, ‘‘ऐसा कुछ नहीं है. छह साल से वे यहां पर थे. हमें आर्डर मिला हम यहां आ गए उन्हें आर्डर मिला वे चले गए. विज्ञापन रोके जाने या पेमेंट रोके जाने जैसी कोई बात नहीं थी.’’

काशी विश्वनाथ कोरिडोर को लेकर की गई रिपोर्ट पर सरकार की नाराजगी को लेकर प्रवीण कुमार कहते हैं, ‘‘ऐसा कुछ भी नहीं था. वो तो छपता रहता है. जैसी स्टोरी होगी वैसी छपेगी.’’

विज्ञापन की राशि रोकने के संबंध में न्यूजलॉन्ड्री ने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव अवनीश अवस्थी से बात करने की कोशिश की लेकिन फोन पर उनसे बात नहीं हो सकी. हमने उन्हें इसको लेकर सवाल भी भेजा लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया. जवाब आने पर इसे खबर में जोड़ दिया जाएगा.

वहीं टाइम्स ऑफ़ इण्डिया के प्रधान संपादक जयदीप बोस को भी हमने इस संबंध में मेल किया है लेकिन उनका भी कोई जवाब नहीं मिला. जवाब आने पर हम उसे भी ख़बर में जोड़ देंगे.

योगी प्रशासन का पत्रकारों के प्रति टेडी नजर

योगी सरकार में पत्रकारों को अपनी भूमिका बेहतर तरीके से निभाने के कारण प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है. यूपी में मिड डे मील में बच्चों को नमक-रोटी खिलाने पर रिपोर्ट करने वाले पत्रकार पर साजिश करने का मामला दर्ज कर लिया गया था. पुलिस की लापरवाही पर आजमगढ़ में रिपोर्ट करने वाले पत्रकार पर मामला दर्ज कर लिया गया था.

लखनऊ के कई पत्रकार कहते हैं कि जो भी सरकार को परेशान करने की कोशिश कर रहा है सरकार उसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से परेशान कर रही है. उनका विज्ञापन रोक दिया जाता है, या जिसे विज्ञापन दिया भी जा रहा है तो उसका पेमेंट रोक दिया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के साथ हो रही ज्यादातरी को लेकर न्यूजलॉन्ड्री ने एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित किया था.

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