पॉडकास्ट: कोविड-19 के वायरस से कैसे बचेगी झुग्गियों में रहने वाली आबादी?

कोरोना संकट पर विदेशी मीडिया में छप रही रिपोर्ट और लेखों पर आधारित हिंदी पॉडकास्ट.

पॉडकास्ट: कोविड-19 के वायरस से कैसे बचेगी झुग्गियों में रहने वाली आबादी?
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कोविड-19 पॉडकास्ट. इस सीरीज के तहत हम देश और दुनिया के अलहदा मीडिया संस्थानों द्वारा प्रकाशित होने वाली कोरोना से संबंधित लेख और रिपोर्टस को हिंदी पॉडकास्ट की शक्ल में आपके सामने रख रहे है. यह मूल लेख का अविकल अनुवाद नहीं बल्कि भावार्थ है.

इस पॉडकास्ट में हम न्यूयॉर्क टाइम्स में छप चुके ली डब्ल्यू रिले, ईवा राफेल, रॉबर्ट स्नाइड का लेख प्रस्तुत कर रहे है. इसका हिंदी अनुवाद मोहम्मद ताहिर ने किया है. इस लेख में तीनों लेखकों ने बताया हैं कि हाशिए पर पड़ी मलिन बस्तियों में रहने वाली एक अरब से ज्यादा आबादी कैसे इस वायरस से बच पाएगी.

डब्ल्यू रिले, ईवा राफेल और रॉबर्ड स्नाइड कहते हैं कि कोविड-19 महामारी उन लोगों ने फैलाई जो हवाई जहाज और लग्जरी क्रूज़ के खर्चे वहन कर सकते है, लेकिन अब यह वायरस सामाजिक रूप से अदृश्य और भुला दिए गए शहरी मलिन बस्तियों में रहने वालों को चुनौती दे रहा है.

संक्रामक रोग, महामारियां फैलने के लिए झुग्गी-बस्तियां आदर्श हैं. भारत में मुम्बई की धारावी, पाकिस्तान में कराची शहर का ओरंगी इलाका और मनीला के पयातास बस्ती में पहले ही कोविड-19 संक्रमण के मामले पाए जा चुके हैं. 2014-2016 में दक्षिण अफ्रीका में फैली इबोला महामारी भी लाइबेरिया, गिनीऔर सिएरा लियोन की बड़ी और घनी आबादी वाली झुग्गियों में बड़े पैमाने पर फैली थी.

इस लेख में तीनों विज्ञानियों ने यह बात स्थापित करने की कोशिश की है कि सरकार को सबसे पहली प्राथमिकता झुग्गी-झोपड़ी, बेघर और शरणार्थी शिविरों में रह रहे है लोगों को देनी चाहिए, वरना हालात बेकाबू होंगे तो इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए कोई जरिया नहीं रहेगा.

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