दो दिन में ही आंखी दास को सोशल मीडिया से जान का ख़तरा क्यों सताने लगा?
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दो दिन में ही आंखी दास को सोशल मीडिया से जान का ख़तरा क्यों सताने लगा?

फेसबुक की पब्लिक पॉलिसी की निदेशक आंखी दास द्वारा ‘अपनी जान को खतरे का अंदेशा’ बताकर दिल्ली साइबर सेल में की गई शिकायत का सच.

By न्यूज़लॉन्ड्री टीम

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फेसबुक कंपनी की पब्लिक पॉलिसी निदेशक (भारत, दक्षिण एशिया और मध्‍य एशिया) आंखी दास ने 16 अगस्‍त की रात पांच नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ दिल्‍ली पुलिस की साइबर सेल में ‘अपनी जान को खतरे का अंदेशा’ बताकर एक शिकायत ऑनलाइन दर्ज करवाई है. इनमें पत्रकार आवेश तिवारी भी शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि न्यूज़ वायर संस्था आईएएनएस और द क्विंट हिंदी सहित कुछ मीडिया संस्थानों ने इस शिकायत को एफआईआर बताकर खबरें चलाई, जो कि गलत है.

16 अगस्त की रात आंखी दास ने हिमांशु देशमुख, आवेश तिवारी, अनामिका सिंह, ट्राविस बिकल, @justanalysis1 नाम के ट्विटर हैंडल और अन्‍य अज्ञात लोगों के खिलाफ साइबर सेल को शिकायत भेजी कि इन पांच नामजद और अन्‍य अज्ञात लोगों ने आंखी दास को हिंसक धमकियों वाली पोस्ट अपने सोशल मीडिया पर साझा की है. दास ने पुलिस से आग्रह किया है कि वो इस पर एफआईआर दर्ज करे. लेकिन अभी तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है.

शिकायत की प्रति
शिकायत की प्रति

अपनी शिकायत में सबसे पहले उन्‍होंने ट्राविस बिकल नाम से एक ट्विटर हैंडिल का जिक्र किया है. पहली ही नज़र में ही यह हैंडल फर्जी (ट्रोल) होने का अहसास देता है. इस हैंडल ने एक भी अपना पोस्ट नहीं डाला. इस पेज पर केवल रीट्वीट्स हैं.

इसी तरह दास ने अपनी शिकायत में किसी अनामिका सिंह का नाम भी दर्ज किया है. उनके नाम के साथ (@its_annu_) को उनका ट्विटर हैंडल बताया है. दिलचस्प यह है कि (@its_annu_) किसी अनामिका सिंह का हैंडल नहीं बल्कि मोहम्मद अनस नाम के व्यक्ति का ट्विटर हैंडल है. इस हैंडल से रिप्‍लाइ करते हुए 16 अगस्‍त की शाम को लिखा गया: ‘आंखी दास मुर्दाबाद’. मोहम्‍मद अनस के नाम से दिख रहे पेज पर आखिरी रीट्वीट दिसंबर 2017 की है.

तीसरा नामजद आरोपी जिस हैंडिल (@justanalysis1) को बनाया गया है, शिकायत में उसके दिये यूआरएल पर जाने से पता लगता है कि इस हैंडिल ने वकील साकेत गोखले के ट्वीट पर रिप्‍लाइ करते हुए फेसबुक के आधिकारिक हैंडिल को टैग किया था. 16 अगस्‍त की शाम को की गई इस रिप्लाइ में लिखा था:

“फेसबुक, तुम्‍हारी आंखी दास को पब्लिक में दौड़ा कर लटकाया जा सकता है. फेसबुक को भारत में अपनी दुकान बंद कर देनी चाहिए. भारत छोड़ो.”

चौथा आरोपी हिमांशु देशमुख को बनाया गया है. इनके जिस यूआरएल को शिकायत में शामिल किया गया है वह दरअसल एक फेसबुक शेयर है. यह फेसबुक शेयर आंखी दास द्वारा नामजद एक और आरोपी आवेश तिवारी का फेसबुक स्‍टेटस है. आवेश तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहते हैं. फिलहाल वो स्वराज्य एक्सप्रेस के लिए काम कर रहे हैं.

शिकायत की प्रति
शिकायत की प्रति

आवेश ने हमें बताया, “यह सरासर धमकाने और डराने की कोशिश है. मेरा आंखी दास से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं, जान पहचान नहीं. वो मेरे ऊपर आरोप लगा रही है कि मैंने यौन उत्पीड़न किया, जान से मारने की धमकी दी. बतौर पत्रकार मैंने वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर फेसबुक पर एक स्टेटस डाला था. इसको धमकी बताना हास्यास्पद है. मैंने खुद इस मामले में यहां (रायपुर) के कबीरनगर थाने में आंखी दास के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज करवाई है.”

आवेश तिवारी ने आंखी दास और दो अन्य लोग जो फेसबुक पर उन्हें धमकी दे रहे थे उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है. तिवारी का आरोप है कि उनकी फेसबुक पोस्ट के बाद लोग उन्हें धमकी देने लगे. इसके अलावा उन्हें फोन पर धमकियां मिल रही हैं. उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आंखी दास पर देश भर में धार्मिक आधार पर दुश्मनी फैलाने का आरोप अपनी एफआईआर में लगाया है.

आंखी दास ने अपनी शिकायत में आवेश तिवारी के फेसबुक स्‍टेटस का यूआरएल डाला है. इस स्टेटस में तिवारी ने वॉल स्‍ट्रीट जर्नल में फेसबुक के बारे में छपी स्‍टोरी को आठ बिंदुओं में समझाते हुए एक तस्‍वीर डाली है जिसमें आंखी दास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दिख रही हैं.

आंखी दास ने शिकायत में लिखा है कि ये सभी ‘धमकियां’ उन्‍हें 14 अगस्‍त को वॉल स्‍ट्रीट जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के हवाले से मिल रही हैं जिसे भारत में सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है.

आंखी दास लिखती हैं कि उपर्युक्‍त व्‍यक्तियों ने ‘अपनी राजनीतिक सम्‍बद्धता’ के चलते जानबूझ कर उन्‍हें बदनाम किया है तथा उन्‍हें अपने और अपने परिवार वालों की सुरक्षा का डर सता रहा है.

अपनी शिकायत में दास पुलिस को आइपीसी की उन धाराओं का सुझाव दे रही हैं जिनके तहत इन पांचों आरोपितों पर पर मुकदमा किया जाना चाहिए. विडम्‍बना यह रही कि भारत में कुछ प्रकाशनों ने दास द्वारा शिकायत में सुझायी गई धाराओं को एफआइआर मानते हुए ख़बर बना दी गई. एफआइआर की यह गलत ख़बर समाचार एजेंसी आइएएनएस ने स्रोतों के हवाले से चलायी थी.

इस शिकायत में एक दिलचस्‍प बात यह है कि आंखी दास द्वारा नामजद बनाये गये चार व्‍यक्ति/हैंडिल की कार्रवाइयां किसी न किसी रूप में वकील साकेत गोखले के ट्वीट से जुड़ी हैं लेकिन साकेत गोखले को इस शिकायत का हिस्सा नहीं बनाया गया है.

इसे ऐसे समझें कि साकेत गोखले के एक ट्वीट पर दो हैंडल से रिप्‍लाई हुआ जिनका जिक्र शिकायत में है: ये दोनो हैंडल हैं @justanalysis1 और @its_annu_ जबकि तीसरे नामजद ट्राविस बिकल ने उसी थ्रेड में @its_annu_ को जवाब दिया. आंखी दास की शिकायत में इन तीनों को आरोपी बनाया गया, लेकिन साकेत गोखले आरोपी नहीं हैं. इनमें से @its_annu_ का यूआरएल संदिग्ध है.

आंखी दास ने गोखले को आरोपी तो नहीं बनाया है, लेकिन अपनी तस्‍वीर सर्कुलेट करने वाले तीन यूआरएल शिकायत में डाले हैं जिसमें एक स्‍टेटस साकेत गोखले का भी है.

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(फेसबुक न्यूज़लॉन्ड्री और टीमवर्क्स आर्ट्स के सालाना कार्यक्रम मीडिया रंबल का प्रायोजक है.)

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