2024 तक भारत की पांच खरब डॉलर वाली अर्थव्यवस्था के सपने पर पानी फेर सकता है वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण से होने वाला आर्थिक नुकसान सिर्फ राज्यों की आर्थिक क्षति का कारण ही नहीं बल्कि देश के आर्थिक लक्ष्यों को भी काफी पीछे ढकेल सकता है.

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रिपोर्ट के मुताबिक "वायु प्रदूषण के कारण प्रति व्यक्ति आर्थिक नुकसान के आधार पर 2019 में दिल्ली में सर्वाधिक प्रति व्यक्ति आर्थिक नुकसान हुआ है."

परिवेशी पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषण के कारण होने वाली रुग्णता और समय पूर्व होने वाली मौतों के कारण आउटपुट की क्षति से आर्थिक नुकसान की रेंज जहां सबसे छोटा राज्य पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश (9.5 मिलियन डॉलर आर्थिक क्षति) है वहीं उत्तरभारत में सर्वाधिक उत्तर प्रदेश (3188.4 डॉलर) है.

भीतरी या घर के स्रोतों से वायु प्रदूषण के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान की अवधि में, गोवा में 76 लाख डॉलर का कम से कम नुकसान हुआ था. उत्तर प्रदेश में 1829·6 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ, जो देश में सबसे अधिक है.

अध्ययन में कहा गया है, "ओजोन प्रदूषण के कारण समय से पहले होने वाली मौतों के कारण की वजह से जो आर्थिक नुकसान हुआ है उसकी रेंज उत्तर-पूर्व के छोटे से पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड में चार मिलियन डॉलर से लेकर सर्वाधिक 286·2 मिलियन डॉलर तक है."

रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया है कि सफलतापूर्वक राज्यवार रणनीति के साथ वायु प्रदूषण के प्रभाव को कम किया जाता है तो न सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य के बेहतर नतीजे मिलेंगे बल्कि आर्थिक पहलू पर भी तस्वीर चमकदार होगी.

सीएसई के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर विवेक चटोपाध्याय ने कहा कि यह बहु क्षेत्रीय और बहु प्रदूषण वाला संकट है जो कि ऐसी ही दृष्टिकोण वाली योजना की मांग करता है. खासतौर से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इन्हें लागू करना चाहिए.

(डाउन टू अर्थ से साभार)

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