ट्रैक्टर रैली: गाजीपुर बॉर्डर से लाल किले तक का सफर

जब किसान ट्रैक्टर रैली के लिए रवाना हुए तो लोग उन पर फूल बरसा रहे थे.

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जब हम अप्सरा बॉर्डर से शाहदरा टोल प्लाजा पर पहुंचे तो किसान अपने ट्रैक्टरों में जैसे-तैसे हवा भरकर आगे-पीछे करने की कोशिश कर रहे थे. चारों तरफ हवा निकले ट्रैक्टर और टूटी गाड़ियां नजर आ रही थीं. पास ही पैट्रोल पंप पर उनके पहियों में हवा डालने का काम किया जा रहा था. वहां भारी पुलिस बल भी तैनात था.

बड़ौत से आए राजेंद्र सिंह ने बताया. "पुलिस ने उनके साथ अत्याचार किया है. उन्हें यही रूट दिया गया था लेकिन जब वे यहां पहुंचे तो आंसू गैस छोड़ी, और ट्रैक्टरों की हवा निकाल दी. उनके साथ ऐसा अत्याचार किया गया है, जो इससे पहले किसी सरकार ने नहीं किया. यह सरकार का घमंड है और इसका खमियाजा उसे भुगतना होगा."

कई और किसान भी पीएम मोदी को कोसते नजर आए. कुछ युवा अपनी स्कॉर्पियो में हवा भरने की कोशिश कर रहे थे. मैंने जैसे ही उनकी फोटो लेने की कोशिश की तो एक युवा ने पूछा कि क्या आप मीडिया से हैं. मैंने हामी भरी तो उसने कहा ये सब जगह दिखाना कि हमारे साथ क्या हाल किया है. वह मोदी सरकार से काफी नाराज दिखे. अंत में उन्होंने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा, ‘कर ले क्या करेगा, लाल किले पर झंडा तो फिर भी फहरा दिया.’

तब तक लाल किले में किसानों के घुसने और झंडा फहराने की खबरें आम हो चुकी थीं. आईटीओ पर एक किसान की मौत की खबर भी थी. यहां से लगभग 4 बजे मैं लाल किले की तरफ निकला लेकिन चारों तरफ के रास्ते बंद किए हुए थे. आखिर मैंने मैट्रो पकड़कर जाने का फैसला किया.

मण्डी हाउस मैट्रो स्टेशन पर दो लड़के आपस में बात कर रहे थे. उनमें एक बोला, मैं मोदी की बात नहीं कर रहा लेकिन अगर कोई भी 303 सीट लेकर आएगा तो यही करेगा.’

मण्डी हाउस पर मैट्रो में अनाउंसमेंट हुआ कि मैट्रो सुरक्षा कारणों से कारण बीच में कहीं नहीं रुकेगी. सीधे कश्मीरी गेट पर मैट्रो से उतर जब मैं लाल किले की तरफ बढ़ा तो किसान ट्रैक्टरों पर वापस आते दिख रहे थे. जब मैं दिन छिपने के बाद पैदल ही लाल किले पहुंचा तो अंदर तक बड़ी संख्या में किसानों के ट्रैक्टर खड़े थे. रैलिंग और टिकट काउंटर टूटे हुए थे.

अधिकतर लोग फोटो ले रहे थे तो कुछ लोग वीडिय़ो कॉल कर वहां का नजारा दिखा रहे थे. अंदर पूरे लाल किले पर पैरामिलिट्री के जवान कब्जा जमाए हुए थे. साथ ही बहुत भारी तादाद में अफसर भी जवानों के साथ चारों ओर गश्त कर रहे थे. लाल किले पर तिरंगे के साथ प्रदर्शनकारियों का झंडा अभी भी लहरा रहा था.

कुछ देर बाद पूरे लाल किले की लाइट बंद कर दी गई और पुलिस ने कई आंसू गैस के गोले छोड़े. जिससे प्रदर्शनकारी बाहर निकलें. इसके बाद लाल किले के अंदर से कई ट्रैक्टर बाहर निकलते दिखे. और लोगों में भी अफरा-तफरी नजर आई. जब मैं वहां से निकला तब भी बहुत से प्रदर्शनकारी लाल किले में जमा थे.

जब हम अप्सरा बॉर्डर से शाहदरा टोल प्लाजा पर पहुंचे तो किसान अपने ट्रैक्टरों में जैसे-तैसे हवा भरकर आगे-पीछे करने की कोशिश कर रहे थे. चारों तरफ हवा निकले ट्रैक्टर और टूटी गाड़ियां नजर आ रही थीं. पास ही पैट्रोल पंप पर उनके पहियों में हवा डालने का काम किया जा रहा था. वहां भारी पुलिस बल भी तैनात था.

बड़ौत से आए राजेंद्र सिंह ने बताया. "पुलिस ने उनके साथ अत्याचार किया है. उन्हें यही रूट दिया गया था लेकिन जब वे यहां पहुंचे तो आंसू गैस छोड़ी, और ट्रैक्टरों की हवा निकाल दी. उनके साथ ऐसा अत्याचार किया गया है, जो इससे पहले किसी सरकार ने नहीं किया. यह सरकार का घमंड है और इसका खमियाजा उसे भुगतना होगा."

कई और किसान भी पीएम मोदी को कोसते नजर आए. कुछ युवा अपनी स्कॉर्पियो में हवा भरने की कोशिश कर रहे थे. मैंने जैसे ही उनकी फोटो लेने की कोशिश की तो एक युवा ने पूछा कि क्या आप मीडिया से हैं. मैंने हामी भरी तो उसने कहा ये सब जगह दिखाना कि हमारे साथ क्या हाल किया है. वह मोदी सरकार से काफी नाराज दिखे. अंत में उन्होंने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा, ‘कर ले क्या करेगा, लाल किले पर झंडा तो फिर भी फहरा दिया.’

तब तक लाल किले में किसानों के घुसने और झंडा फहराने की खबरें आम हो चुकी थीं. आईटीओ पर एक किसान की मौत की खबर भी थी. यहां से लगभग 4 बजे मैं लाल किले की तरफ निकला लेकिन चारों तरफ के रास्ते बंद किए हुए थे. आखिर मैंने मैट्रो पकड़कर जाने का फैसला किया.

मण्डी हाउस मैट्रो स्टेशन पर दो लड़के आपस में बात कर रहे थे. उनमें एक बोला, मैं मोदी की बात नहीं कर रहा लेकिन अगर कोई भी 303 सीट लेकर आएगा तो यही करेगा.’

मण्डी हाउस पर मैट्रो में अनाउंसमेंट हुआ कि मैट्रो सुरक्षा कारणों से कारण बीच में कहीं नहीं रुकेगी. सीधे कश्मीरी गेट पर मैट्रो से उतर जब मैं लाल किले की तरफ बढ़ा तो किसान ट्रैक्टरों पर वापस आते दिख रहे थे. जब मैं दिन छिपने के बाद पैदल ही लाल किले पहुंचा तो अंदर तक बड़ी संख्या में किसानों के ट्रैक्टर खड़े थे. रैलिंग और टिकट काउंटर टूटे हुए थे.

अधिकतर लोग फोटो ले रहे थे तो कुछ लोग वीडिय़ो कॉल कर वहां का नजारा दिखा रहे थे. अंदर पूरे लाल किले पर पैरामिलिट्री के जवान कब्जा जमाए हुए थे. साथ ही बहुत भारी तादाद में अफसर भी जवानों के साथ चारों ओर गश्त कर रहे थे. लाल किले पर तिरंगे के साथ प्रदर्शनकारियों का झंडा अभी भी लहरा रहा था.

कुछ देर बाद पूरे लाल किले की लाइट बंद कर दी गई और पुलिस ने कई आंसू गैस के गोले छोड़े. जिससे प्रदर्शनकारी बाहर निकलें. इसके बाद लाल किले के अंदर से कई ट्रैक्टर बाहर निकलते दिखे. और लोगों में भी अफरा-तफरी नजर आई. जब मैं वहां से निकला तब भी बहुत से प्रदर्शनकारी लाल किले में जमा थे.

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