उदासीन तृणमूल, सांप्रदायिक भाजपा: नंदीग्राम के मुसलमानों के लिए भूल की कोई गुंजाइश नहीं

भाजपा प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी का एजेंडा हिंदुओं और मुसलमानों को विभाजित करना है, और जय श्री राम जैसे नारों की वजह से डर फैला हुआ है.

उदासीन तृणमूल, सांप्रदायिक भाजपा: नंदीग्राम के मुसलमानों के लिए भूल की कोई गुंजाइश नहीं
सेवानिवृत्त एसके अब्दुल अजीज ने नंदीग्राम के मंगलचक में लगाए जाने वाले पोस्टर और झंडे तैयार किए
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तृणमूल समर्थकों का एक परिवार

नंदीग्राम ब्लॉक 2 के मंगलचक गांव में हम एक मुस्लिम परिवार से मिले, जिसमें सभी लोग तृणमूल पार्टी कार्यकर्ता और ममता बनर्जी के सक्रिय समर्थक थे. एसके अब्दुल अजीज़, उनके बेटे एसके रज़ब और पोते एसके रहमान, ब्लॉक में हर तरफ तृणमूल के झंडे लगाने के लिए उन्हें साथ पिरोने में लगे थे. 67 वर्षीय अजीज़, जो दमकल विभाग से रिटायर हुए हैं पोस्टरों पर गोंद लगा रहे थे जिन्हें बाद में वह पूरे इलाके में चिपका देंगे.

रजब ने हमें बताया, "हम वफादार तृणमूल समर्थक हैं. मैं एक स्कूल टीचर था और जब छोटा था तभी से राजनीति से जुड़ा रहता था. मैं अपने ब्लॉक में पिछले 15 साल से तृणमूल का कार्यकर्ता हूं."

जब हमने उनसे पूछा कि क्या उन्हें कोई पोस्टर लगाने और झंडे टांगने के लिए कोई पैसे देता है, तो उन्होंने जवाब दिया कि वह ऐसा तृणमूल के प्रति अपनी वफादारी की वजह से करते हैं. उनका जवाब था कि, "पार्टी हमें यह सब सामान मुहैया कराती है और हम पक्का करते हैं कि यह सब हर तरफ ब्लॉक में लग जाएं. इस काम को करने के हमें कोई पैसे नहीं देता."

रजब (बाएं) और उनके बेटे रहमान दोनों टीएमसी पार्टी के कार्यकर्ता हैं.

रजब (बाएं) और उनके बेटे रहमान दोनों टीएमसी पार्टी के कार्यकर्ता हैं.

हमसे बातचीत में तृणमूल कार्यकर्ताओं की 3 पीढ़ियों ने हमें बताया कि वह ममता बनर्जी और उनकी सरकार से बहुत खुश हैं.

जब बातचीत अधिकारी की तरफ घूमी, तो रजब ने हमसे कहा, "भाजपा में उनका प्रचार बहुत अलग है. उनका एजेंडा हिंदू मुस्लिम वोटों को विभाजित करना है. इस इलाके में हर तरह की आस्था वाले लोग पीढ़ियों से शांति और समन्वय से रह रहे हैं. यह बंगाल के लिए अच्छा नहीं है. अगर यही जारी रहा तो बंगाल के गांव जल जाएंगे."

क्या उन्होंने ज़मीन पर सांप्रदायिक गतिविधियां देखी हैं? इसके जवाब में रजब कहते हैं, "हम यह हर रोज़ देखते हैं. जब हम इलाके के हिंदुओं से बात करते हैं, तो वो कहते हैं, भाजपा एक हिंदू पार्टी है तो उन्हें एक बार मौका देते हैं. नुकसान ही क्या है?"

रहमान कहते हैं कि उन्होंने यह विभाजन गांव के कम उम्र के लोगों में भी देखा है. वे बताते हैं, "भाजपा को यहां कुछ समर्थन प्राप्त है. सारे सीपीआईएम समर्थक भाजपा में चले गए हैं क्योंकि वह तृणमूल से नफरत करते हैं. 2011 के बाद से सीपीआईएम के पास कोई नेतृत्व नहीं था और उनके समर्थक इसके लिए तृणमूल कांग्रेस को दोषी ठहराते हैं. अब उन्हें भाजपा मिल गई है और वह बदला चाहते हैं."

रैलियों में हमसे मिले कई भाजपा कार्यकर्ता सीपीआईएम से भाजपा में आज आने वाली बात की पुष्टि करते हैं. उन्होंने कहा कि "पहले बाम, अभी राम."

हमने रहमान से पूछा कि क्या उन्होंने इलाके में किसी सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं के बारे में सुना या देखा है. उन्होंने उत्तर दिया, "हाल ही में अभी एक घटना पास में हुई थी. कुछ मुसलमान इलाके में नमाज़ पढ़ रहे थे और वहीं पर कुछ आदमी आ गए. उन्होंने मुसलमानों को परेशान करने के लिए "जय श्री राम" चिल्लाना शुरू कर दिया. वह ऐसा क्यों करते हैं? हम सब अपनी अपनी आस्था का अनुसरण क्यों नहीं कर सकते?"

रजब की पत्नी सबीना बीबी ने हमें बताया कि भाजपा के मुस्लिम विरोधी बातों और परिवेश को लेकर वे आशंकित हैं. उन्होंने कहा, "हमें 'जय श्री राम' से कोई दिक्कत नहीं. वह जिस भी भगवान में विश्वास रखते हैं, उसका नारा लगायें. लेकिन अगर भाजपा जीतती है, तो हमें डर है कि वह हमसे भी वही नारा लगवाएंगे."

आगे हम अब्दुल और उसके परिवार से उनके घर पर मिले. अब्दुल उनका असली नाम नहीं है.

उन्होंने कहा, "यह हिंदू-मुस्लिम बटवारा मुझे बहुत असहज करता है. यहां के हिंदू परिवारों में भाजपा के लिए समर्थन है लेकिन मैंने कुछ हिंदुओं को दीदी का समर्थन करते भी देखा है. यहां पर हिंदू वोट पड़ेगा लेकिन मुसलमान एकमुश्त होकर दीदी को वोट करेंगे."

उनकी पत्नी सुल्ताना (नाम बदला हुआ), ने भी जबरदस्ती लगवाए जाने वाले 'जय श्री राम' के लिए पहले कुछ लोगों की तरह अपना डर बताया.

उन्होंने कहा, "अगर वह सत्ता में आए तो भाजपा हमसे 'जय श्री राम' का नारा लगवाएगी. हम ऐसा क्यों करें? हमारे पास हमारा अपना पंत है हम उसका ही अनुसरण करना चाहते हैं. वे अपने रीति रिवाज करें. हम अपने रीति रिवाज और मान्यताओं को खुद कर सकते हैं."

आतिफ (नाम बदला हुआ) एक ईंट के भट्टे में काम करते हैं और कहते हैं कि वह उलझन में हैं कि किसके पक्ष में वोट करें. भाजपा उनके लिए विकल्प नहीं है लेकिन तृणमूल का शासन भी उनके लिए केवल मुश्किलों भरा और बिना किसी हित का रहा है.

वह कहते हैं, “तृणमूल ने मुसलमानों के लिए बहुत कुछ किया है, लेकिन मौलवियों को पैसा देने के अलावा उन्होंने क्या किया है? हमारी जिंदगी में क्या बेहतर हुआ है? हर स्तर पर भ्रष्टाचार है, सब चीजें उन्हीं के आदमी, हनी कार्यकर्ता और वह लोग जो उनके करीबी हैं, हज़म कर जाते हैं. मैं भाजपा को वोट नहीं कर सकता लेकिन मैं तृणमूल से नफरत करता हूं. मुझे सोचना पड़ेगा कि किसे वोट दूं."

नंदीग्राम के ब्लॉक 2 में धीरेंद्रनाथ मेटी कहते हैं कि वह एक मिठाई की दुकान चलाते थे, जो उन्हें पिछले साल लॉकडाउन के दौरान मजबूरन बंद करनी पड़ी. अब वह एक स्टेशनरी की दुकान चलाते हैं. उनके पुत्र जो जादवपुर विश्वविद्यालय से पीएचडी हैं इस समय बेरोजगार हैं, लेकिन वह इस चुनावी मौसम में एक पोलिंग ऑफिसर की तरह काम करेंगे.

उनका कहना है कि, "हमें प्रशासन से दया नहीं चाहिए. हमें नौकरियां चाहिए और अपने हाथ में पैसा चाहिए. जवान लड़के बेरोजगार बैठे हैं. मेरी खुद की दुकान बहुत ही कम आमदनी देती है."

उनके और उनके परिवार के लिए, मोदी की "डबल इंजन की सरकार" वाली बात एक आकर्षक संभावना है, जिसको इस चुनाव में मौका देकर देखा जा सकता है.

परीक्षित सान्याल की रिपोर्टिंग और अनुवाद में सहयोग के साथ.

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