कैसे मेटा के शीर्ष पदाधिकारी के संबंध मोदी और बीजेपी के लिए काम करने वाली फर्म से हैं?

ओपालिना टेक्नोलॉजीज नामक फर्म #मैंभीचौकीदार अभियान में शामिल थी. मेटा के शीर्ष पदाधिकारी शिवनाथ ठुकराल की इस फर्म में हिस्सेदारियां थीं और उनके पिता की अब भी हैं.

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ख) #MainBhiChowkidar के लिए फेसबुक फोटो फ्रेम

इसी तरह ओपलिना द्वारा "मैं भी चौकीदार" अभियान के लिए एक फेसबुक प्रोफाइल पिक्चर फ्रेम डेवलप किया किया गया था.

24 मार्च, 2019 को सुबह 10:17 बजे तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के फेसबुक पेज द्वारा भाजपा के लिए #MainBhiChowkidar अभियान का अनावरण किया गया. शाह के पेज का प्रोफाइल पिक्चर बदल दिया गया - इसने खास तौर से प्रोफाइल फोटो में एक "फ्रेम" को जोड़ दिया. जहां सबसे नीचे दायीं ओर प्रधानमंत्री मोदी की प्रोफाइल पिक्चर में एक फ्रेम जोड़ा गया जिसने मोदी की तस्वीर को और उभार दिया. और इसके साथ ही नीचे बायीं ओर हिंदी में "मैं भी चौकीदार" लिखा हुआ था.

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ऐसा लगता है कि यह फेसबुक फोटो फ्रेम ओपलिना द्वारा बनाया गया है. अमित शाह द्वारा इस पेज के लॉन्च से पहले ओपालिना के कर्मचारियों को इसकी टेस्टिंग करते देखा जा सकता है.

"जॉर्ज जॉर्ज" नामक एक फेसबुक अकाउंट जिसके बारे में ऐसा प्रतीत होता है कि यह ओपलिना कर्मचारियों द्वारा ही चलाया जाता है, के द्वारा प्रोडक्ट के लाइव होने से लगभग दो घंटे पहले तक यानी अंतिम वक्त तक फ्रेम का परीक्षण किया गया. इस एकाउंट ने भी उसी फ्रेम के साथ उसी दिन सुबह 8:43 बजे एक तस्वीर पोस्ट की जिस दिन अमित शाह द्वारा यह फ्रेम पोस्ट किया गया था.

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लेकिन हमें यह कैसे पता है कि "जॉर्ज जॉर्ज" असल में एक ओपालिना एकाउंट ही है?

इस एकाउंट में तीन फेसबुक फ्रेंड्स हैं - "सतीश ओपलिना", "डीएसएम सिवा", और "जेया जेजे".

डीएसएम सिवा ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर ओपालिना टेक्नोलॉजीज को अपने नियोक्ता के रूप में दर्शाया है. जेया जेजे भी अपने नियोक्ता को अपने लिंक्डइन प्रोफाइल पर ओपालिना टेक्नोलॉजीज के रूप में दर्शाती हैं. सतीश ओपालिना सिर्फ दो फेसबुक फ्रेंड्स के साथ एक अन्य टेस्टिंग एकाउंट मात्र ही प्रतीत होता है. सतीश ओपालिना के ये दो फेसबुक फ्रेंड्स थे- सतीश चंद्रा जो कि ओपालिना के निदेशकों में से एक थे और दूसरे थे "जॉर्ज जॉर्ज" एकाउंट.

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लगभग एक ही समय में "जॉर्ज जॉर्ज" ने #MainBhiChowkidar फ्रेम का उपयोग करके अपना प्रोफाइल पिक्चर अपडेट किया, डीएसएम ने भी उसी वक्त फ्रेम के साथ अपना प्रोफाइल पिक्चर अपडेट किया. डीएसएम सिवा ने भी उसी दिन सुबह 8:50 पर अमित शाह की पोस्ट से 83 मिनट पहले फोटो पोस्ट की थी.

ग) मोदी जी के फेसबुक पेज पर टिप्पणियों को मॉडरेट करने और पीएमओ द्वारा प्राप्त पत्रों का प्रबंधन के लिए ओपालिना प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया गया था

विमल कुमार नाम के एक ओपालिना कर्मी ने अपने लिंक्डइन प्रोफाइल पर पहले से ही अपलोडेड रिज़्यूमे में उन्होंने स्वयं के द्वारा अपनी कंपनी के लिए निष्पादित परियोजनाओं का ब्यौरा दिया है. कुमार का वह बायोडाटा जो अब उनके लिंक्डइन प्रोफाइल पर दिखाई नहीं पड़ता इन रिपोर्टर्स द्वारा पुनर्प्राप्त और संग्रहीत किया गया था जबकि उसे प्रोफाइल पर भी देखा जा सकता था.

कुमार से संपर्क करने पर उन्होंने यह दावा किया कि इन परियोजनाओं को निष्पादित नहीं किया गया है और उनका उल्लेख अपने लिंक्डइन प्रोफाइल में करना सिर्फ एक गलती रही होगी.

कुमार के रिज़्यूमे में उन दो परियोजनाओं का वर्णन है जिन पर उन्होंने काम किया है.

पहला "एनएम कमेंटस मॉडरेशन पैनल" है. इसे नरेंद्र मोदी के फेसबुक पेज पर यूजर्स से प्राप्त टिप्पणियों के मॉडरेशन के लिए एक पैनल के तौर पर दर्शाया गया था.

विमल कुमार के रिज़्यूमे में दर्शायी गई दूसरी परियोजना प्रधानमंत्री कार्यालय या पीएमओ हेतु थी जो कि भारत सरकार की एक संस्था है. "एनएम लेटर्स" नाम की इस परियोजना को पीएमओ द्वारा प्राप्त पत्रों के प्रबंधन हेतु इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री प्रबंधन प्रणाली के रूप में दर्शाया गया है.

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इन रिपोर्टरों ने कुमार से फोन पर बात की और उनसे पूछा कि क्या उनके नियोक्ता (ओपालिना) ने उन्हें लिंक्डइन से अपना बायोडाटा हटाने के लिए कहा था. उन्होंने इसका जवाब दिया, नहीं, उन्हें ऐसा करने के लिए नहीं कहा गया था.

हमने उनसे पूछा कि क्या उनके द्वारा वास्तव में उन परियोजनाओं पर काम किया गया है जिन्हें उन्होंने अपने रेज़्यूमे में दर्शाया था. उन्होंने इसके जवाब में भी नहीं ही कहा.

तो फिर उन्होंने अपने रेज़्यूमे में उन परियोजनाओं को दर्शाया ही क्यों था? इस पर विमल कुमार ने जवाब दिया: "यह गलती से हुआ होगा."

हालांकि ये रिपोर्टर्स स्वतंत्र रूप से कुमार के उन दावों की पुष्टि नहीं कर पाए जो कि पूर्व में उनके लिंक्डइन प्रोफाइल में उपलब्ध रेज़्यूमे में दर्शायी गई थी.

घ) कपड़ा मंत्रालय के 'कॉटन इज कूल' अभियान के लिए ट्विटर बॉट

ठुकराल के फेसबुक से जुड़ने से पहले ही ओपालिना ने 16 मई, 2017 को भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल और केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के लिए एक ट्विटर हैशटैग अभियान डेवलप किया था.

हैशटैग #CottonIsCool अगले कुछ दिनों तक कई हाई-प्रोफाइल ट्विटर यूजर्स द्वारा इस्तेमाल किया गया- जिसमें भाजपा नेता, पत्रकारों की सत्यापित प्रोफाइल्स, इंफ्लुएंसर्स और सार्वजनिक हस्तियां शामिल हैं. इसके अलावा दूसरे बहुत से ट्विटर यूजर्स भी शामिल थे.

पूर्व कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने 17 मई, 2017 को इस अभियान की सफलता का जश्न भी मनाया था.

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ओपालिना को द ट्रू पिक्चर नाम की एक वेबसाइट से भी जोड़ा जा सकता है जो मोदी जी का समर्थन करती है. इस वेबसाइट पर दुष्प्रचार करने का आरोप भी है. वेब सर्च से पता चलता है कि वेबसाइट पर अपलोड किए गए लेख www.opalina.in स्टेजिंग प्लेटफॉर्म पर भी होस्ट किए जाते हैं. यह वेबसाइट दिल्ली स्थित ब्लूक्राफ्ट डिजिटल सर्विसेज द्वारा चलाई जाती है.

फेसबुक में ठुकराल के कार्यकाल से पहले ओपालिना ने दूसरी सरकारी परियोजनाओं पर भी काम किया था.

इससे कुछ महीने पहले ही सितंबर 2016 में उत्तर प्रदेश पुलिस और ट्विटर ने एक नई तरह की साझेदारी का अनावरण किया: ट्विटर सेवा नामक एक मंच का. इस मंच के माध्यम से उत्तर प्रदेश पुलिस 200 से अधिक एकाउंट्स के माध्यम से जनता से प्राप्त इनपुट का प्रबंधन कर सकती है और ट्विटर के माध्यम से सूचना के प्रसार का समन्वय कर सकती है.

जैसा कि ट्विटर इंडिया के तत्कालीन अधिकारी राहिल खुर्शीद ने एक ब्लॉगपोस्ट में बताया था कि ट्विटर के लिए ओपालिना द्वारा ही इस मंच को तैयार किया गया था.

खुर्शीद फिलहाल अमेरिका में हैं. वो हमसे कैमरे पर बातचीत करने के लिए तैयार हो गए. उन्होंने हमें बताया कि वो शिवनाथ ठुकराल को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जानते हैं जो "ओपलिना के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ था और उसके सलाहकार के तौर पर काम करता था."

ओपालिना पर उन्होंने कहा, "ट्विटर के पास अपने पार्टनर्स हैं. हमारे पास भागीदारों की एक पूरी प्रणाली थी जिसमें हमारी क्षमता को बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में कंपनियां शामिल थीं. ओपालिना इन्हीं कंपनियों में से एक थी."

ओपालिना के काम की तारीफ करते हुए उन्होंने आगे कहा, "ट्विटर के लिए यह एक महत्वपूर्ण कंपनी थी, हम उनकी सेवाओं से बहुत खुश थे; वे समय पर काम पूरा कर लेते. इसके साथ ही वो परिणाम उन्मुख और कुशल थे."

खुर्शीद ने हमें बताया कि भारत के सबसे बड़ी आबादी वाले सूबे के पुलिस विभाग को ट्विटर सेवा की पेशकश की गई थी और इसमें कोई वित्तीय लेनदेन शामिल न होने के कारण कोई निविदा प्रक्रिया भी नहीं थी. इसके बाद इसी तरह के कई प्रोडक्ट्स को भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के लिए ओपालिना द्वारा डेवलप किया गया जिसमें रेलवे, विदेश मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय शामिल थे.

हालांकि सोशल मीडिया पर आधारित इन कस्टमर रिलेशन मैनेजमेंट टूल्स के लिए इनमें से किसी भी सरकारी मंत्रालय द्वारा कोई निविदा जारी नहीं की गई है. इन प्लेटफॉर्म्स के डेवलप होने और बाद में इन्हें रद्द करने से पहले कई निविदाएं जारी की गई थीं. इन निविदाओं ने डिजिटल सेवाओं के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं. अमूमन इनका आधार एक जैसा ही था. इनमें विभिन्न मंत्रालयों और MyGov.in वेबसाइट के लिए सोशल मीडिया एनालिटिक्स सॉल्यूशंस को लागू करने हेतु भी कई निविदाएं शामिल हैं.

ओपालिना ने जून 2017 के दूसरे सप्ताह में अपनी वेबसाइट को अपडेट करते हुए अपने बिजनेस पोर्टफोलियो में "बिग डेटा एनालिटिक्स" और भारत सरकार के साथ ट्विटर को भी अपने ग्राहकों की सूची में जोड़ा.

ओपालिना के वित्त में भी सुधार होना शुरू हो गया था. वित्त वर्ष 2013-14 (31 मार्च को खत्म होने वाले वित्त वर्ष में) में इसका कुल राजस्व लगभग 19 लाख रुपए था जो कि 2017-18 में बढ़कर 7.67 करोड़ रुपए और 2020-21 में बढ़कर 10.25 करोड़ रुपए हो गया. (कंपनी का पिछले साल का वित्तीय डाटा उपलब्ध है).

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इन रिपोर्टरों ने 18 अप्रैल को ठुकराल, कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल, कपड़ा सचिव उपेंद्र प्रसाद सिंह, पूर्व कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी और ओपालिना के सह-संस्थापक गौरव शर्मा और केन फिलिप को एक प्रश्नावली भेजी थी. पीएमओ में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी के लिए विशेष सेवा अधिकारी हिरेन जोशी और मेटा में भारत की संचार निदेशक बिपाशा चक्रवर्ती को भी यह प्रश्नावली भेजी गई थी.

अब तक सिर्फ ओपालिना के गौरव शर्मा ने ही जवाब दिया है. यहां उनका उत्तर दोबारा शब्दशः प्रस्तुत किया जा रहा है:

"आप हमारे सामने जिस तरह के सवाल रख रहे हैं वह धोखेबाजी और गोल-गोल घूमाकर पूछताछ करने के अलावा और कुछ नहीं हैं, जिससे कि हमारी कंपनी को आपके गलत उद्देश्यों की पूर्ति हेतु गोपनीय और मालिकाना जानकारी साझा करनी पड़े. हम अपनी मालिकाना जानकारी की रक्षा के लिए कानून के अनुसार हर संभव कदम उठाने के अपने अधिकार को तो सुरक्षित रखते ही हैं और इसके साथ ही हम अपनी कंपनी के स्वामित्व वाली किसी भी मालिकाना जानकारी को चुराने के किसी भी प्रयास/उकसावे के लिए आपराधिक शिकायत दर्ज करने में संकोच नहीं करेंगे.”

हम दूसरे लोगों के जवाबों का इंतजार कर रहे है. उनके जवाब आते ही उन्हें इस रिपोर्ट में जोड़ दिया जाएगा.

इस रिपोर्ट के सभी लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

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